Saturday, 2 July 2016

शनिग्रह को प्रसन्न करे और पाए जीवन में सफलता|

शनि देव की पूजा का विशेष निधान होता है| इस बार शनि जयन्ती भी शनिवार के दिन आ रही है जिसके चलते शनि अमावस्या का योग बन रहा है| शनि हिन्दू ज्योतिष के अनुसार नौ मुख्य ग्रहों में से एक हैं। शनि बाकि ग्रहों की अपेक्षा अत्यन्त धीमे चलते हैं, इसलिए इन्हें शनैश्चर भी कहते है। शनि ग्रह वायु तत्व और पश्चिम दिशा के स्वामी मने जाते हैं। हमारे Vashikaran mantra in Mumbai बाबा जी आपको सभी प्रकार की परेशानियों से छुटकारा दिलवा सकते है|  हमारे शास्त्रों के अनुसार शनि जयंती पर उनकी पूजा-आराधना और अनुष्ठान करने से शनिदेव विशिष्ट फल प्रदान करते हैं।


आइए हम आपको शनि जयन्ती पर शनि पूजा की विधि के बारे में बताएंगे जिससे आपको निश्चित ही फल प्राप्ति होगी|

 शनि जयन्ती पूजा-

 शनि जयन्ती के मौके पर शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए नियमानुसार विधि-विधान के अनुसार पूजा पाठ तथा व्रत रखा जाता है| शनि जयंती के अवसर पर किया गया दान-पुण्य एवं पूजा-पाठ शनि संबंधी सभी कष्ट दूर करने में सहायक होता है। शनिदेव के नियमनुसार पूजा करने हेतु भक्तो को चाहिए कि वे शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी स्नान आदि से निवृत्त होकर नवग्रहों को नमस्कार करते हुए शनिदेव की लोहे की मूर्ति को स्थापित करें और उसे सरसों या तिल के तेल से स्नान कराएं तथा षोड्शोपचार पूजन करें। साथ ही शनि मंत्र का उच्चारण करें 'शनिश्चराय नम:।।'

 इसके बाद पूजा की सामग्री सहित शनिदेव से संबंधित वस्तुओं का दान भी करें। इस प्रकार पूजन के बाद दिन भर निराहार रहें व मंत्र का जप करें। शनि की कृपा एवं शांति प्राप्ति हेतु तिल, उड़द, काली मिर्च, मूंगफली का तेल, आचार, लौंग, तेजपत्ता तथा काले नमक का उपयोग करना चाहिए। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए हनुमानजी की पूजा करनी चाहिए। शनि के लिए दान में दी जाने वाली वस्तुओं में काले कपड़े, जामुन, काली उड़द, काले जूते, तिल, लोहा, तेल, आदि वस्तुओं को शनि के निमित्त दान में दे सकते हैं।

 शनि गृह को न्याय का देवता कहा जाता है| शनि देव जनम से ही श्याम वर्ण,लम्बे शरीर तथा बड़ी आँखो वाले थे| शनिदेव हमेशा योग तपस्या में लीं तथा दूसरों की सहायता करने वाले होते है | आप भी शनि पर्व पर अपनी सभी समस्यो से मुक्ति पा सकते है |

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